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उत्तराखंड के पहले स्टार्टअप कंपनी ने लोगों की जेब में पहुंचाई ECG मशीन, 4 साल में 500 करोड़ का कारोबार खड़ा

tapobhoomi May 11, 2026 1 min read

महज 4 साल में 500 करोड़ की उत्तराखंड के पहले स्टार्टअप कंपनी बनाने वाले युवाओं की कहानी जानिए, देहरादून से धीरज सजवाण की रिपोर्ट

देहरादून: आज के बदलते दौर में इंसानों का दिल यानी हृदय कमजोर होता जा रहा है. साथ कम उम्र में ही प्रभावित हो रहा है. जिससे हार्ट अटैक या हृदय संबधी समस्याएं लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है. ऐसे में हृदय रोगों की निगरानी करना बेहद जरूरी हो गया है. ताकि, समय पर इलाज मिल सके और जान बचाई जा सकते.

ऐसे में दिल यानी हार्ट की निगरानी के लिए उत्तराखंड की एक स्टार्टअप कंपनी ने एक ऐसा पोर्टेबल डिवाइस लाया, जो कुछ ही मिनटों में दिल की किसी भी गड़बड़ी का आसानी से पता लगा सकता है. यह स्टार्टअप 2016 में शुरू हुई, जो आज 500 करोड़ नेट वर्थ वाली कंपनी बन चुकी है. ऐसे में उत्तराखंड के पहले स्टार्टअप के रूप में शुरू हुई कंपनी के सफर के बारे में आपको रूबरू करवाते हैं.

उत्तराखंड का पहला स्टार्टअप दे रहा 25 देशों में सेवाएं: साल 2016 में जब भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत की. तब उत्तराखंड में भी स्टार्टअप योजना के तहत नए इनोवेशन और नए आइडियाज को प्रमोट करने की दिशा में सरकारों ने काम किया. इसी के चलते उत्तराखंड में जो पहला स्टार्टअप रडिस्टर्ड किया गया, वो आज 500 करोड़ वैल्यू वाली की एक बड़ी टेक कंपनी के रूप में पहचान बना रही है.

इस नए स्टार्टअप को उस समय देहरादून स्थित नामी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में बीटेक कर रहे 21 वर्षीय रजत जैन ने अपने 23 वर्षीय भाई अर्पित जैन और अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर शुरू किया. जो हेल्थ केयर और टेक्नोलॉजी से जुड़ा था. जिसके तहत उन्होंने एक ऐसा पोर्टेबल डिवाइस डेवलप किया. जिसने दिल की बीमारी की जांच करने वाले भारी भरकम ईसीजी मशीन की जरूरत को देखते हुए इसे हर एक व्यक्ति के पॉकेट तक पहुंचा दिया.

पोर्टेबल ईसीजी मशीन बनाई: शुरुआत में उन्होंने इसे पॉकेट ईसीजी का नाम दिया, तो वहीं रजत जैन और उनके साथियों ने इस प्रोडेक्ट को ‘स्पंदन’ का नाम दिया. जो एक तरह से धड़कन का संस्कृत अनुवाद है. उन्होंने पोर्टेबल स्पंदन ईसीजी डिवाइस (Pocket Sized Portable Spandan ECG Device) बनाया है. जो छोटी और बैटरी से चलनी वाली डिवाइस है. जिससे कोई भी व्यक्ति कहीं से भी और कभी भी अपनी ईसीजी यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (Electrocardiogram) जांच कर सकता है.

उन्होंने इस डिवाइस से ईसीजी रिपोर्ट की सटीकता (Accuracy) को जांचने के लिए कई ट्रायल किए. कई लोगों पर टेस्ट किए. साल 2016 से 2021 तक लगातार इसे रिसर्च और डेवलपमेंट फेज में रखा गया, फिर पहली बार इस टेक्नोलॉजी को रोहित और अर्पित दोनों भाइयों ने सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के रूप में लॉन्च किया. लॉन्च करने के बाद इस प्रोडेक्ट की ‘शार्क टैंक शो’ में एंट्री हई और इस नई टेक्नोलॉजी ने हेल्थ केयर सेक्टर में क्रांति ला दी. शार्क टैंक शो में इस प्रोडेक्ट और टेक्नोलॉजी को 5 स्टार रेटिंग मिली. साथ ही फंडिग भी मिली.

हार्ट जांच करने वाली ईसीजी मशीन को लोगों की जेब तक पहुंचाया: साल 2022 में पोर्टेबल ईसीजी डिवाइस का मास प्रोडक्शन कर सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज प्रा.ली. कंपनी मार्केट में उतरी. अपने यूनिक कांसेप्ट और इनोवेटिव टेक्नोलॉजी के दम पर 5 डायरेक्टर वाली इस कंपनी ने आज यानी साल 2026 में 500 करोड़ रुपए की कंपनी खड़ी कर दी है.

इस बैकग्राउंड से आते हैं कंपनी फाउंडर और सहयोगी: सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर रजत जैन आईटी बैकग्राउंड से तो अर्पित जैन फाइनेंस बैकग्राउंड से आते हैं. उनके अलावा उसके शुरुआती साथी रहे नितिन और सौरभ आईटी बैकग्राउंड से आते हैं. जबकि, उनके एक और साथी सोबित मार्केटिंग बैकग्राउंड से आते हैं.

पांचों लोगों ने अपनी शुरुआत अपने कॉलेज में उत्तराखंड उद्योग विभाग की मदद से लगाए गए इनोवेटर सेंटर से की, जो आज एक बड़ी हेल्थ केयर और टेक कंपनी के रूप में पैर जमा रही है. हाल ही में पांचों दोस्तों की इस कंपनी को टॉप ग्रोइंग टेक कंपनी की पहचान मिली है. आज यह कंपनी नए ऑफिस में शिफ्ट हो चुकी है.

जहां इसमें काम करने वाले लोगों की संख्या 200 के करीब हो चुकी है, तो वहींं आज ये टेक कंपनी दुनिया के 25 अलग-अलग देशों में सर्विसेज दे रही है. नए ऑफिस में शिफ्ट हुई इस कंपनी के फाउंडर और डाइरेक्टर्स से ईटीवी भारत ने बात की. साथ ही उनके इस सफर की क्या कहानी है? क्या शुरुआती चुनौतियां थी और आज किस तरह की नई चुनौतिया हैं? इस पर विस्तार से जानकारी दी.

सॉफ्टवेयर से लेकर हार्डवेयर तक, सब मेक इन इंडिया: ईटीवी भारत से बातचीत में सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज प्रा लि के को-फाउंडर और डायरेक्टर अर्पित जैन ने अपनी कंपनी के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी पोर्टेबल ईसीजी डिवाइसेज के रूप में अपनी सेवाएं देती है, जो कि उनकी खुद की तकनीक है. यह डिवाइस स्मार्ट फोन से कंनेक्ट होती है. जिससे कोई भी हार्ट संबधी समस्याओं पर आसानी से निगरानी रख सकता है.

“मेरे एक दोस्त की हार्ट अटैक के चलते मौत हो गई थी. जब अस्पताल गया तो हार्ट संबधी समस्याओं और उनकी जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली महंगी ईसीजी मशीनें देखी. ऐसे में हमने एक ऐसा पोर्टबल डिवाइस बनाने के बारे सोचा, जो लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होने के साथ किफायती भी हो. जो बाद में स्पंदन डिवाइस के रूप में एक बड़ा समाधान बन कर सामने आया.“- अर्पित जैन, को-फाउंडर, सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज

उन्होंने स्पष्ट तौर पर बताया कि उनकी टेक्नोलॉजी, हार्डवेयर सॉफ्टवेयर समेत पूरा इको सिस्टम स्वदेशी है. हर प्रोडेक्ट और तकनीक मेक इन इंडिया है. उनकी कपंनी में आइडिया से लेकर सेल तक सब भारतीय हैं. सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज में कैसे धीरे-धीरे लोग बढ़ रहे हैं और इस बढ़ते हुए सफर की क्या कहानी है? केसै प्रोडेक्शन और मैन पावर को बढ़ाया जा रहा? इस पर भी अर्पित ने जानकारी दी.

शुरुआत में यूनिक आइडिया को धरातल पर उतारने में आई कई चुनौतियां: अर्पित ने बताया कि वो मुजफ्फरनगर निवासी हैं. जो एक बिल्कुल मिडिल क्लास परिवार से आते हैं. उनके माता-पिता एजुकेशन सेक्टर से हैं. सामान्य सपनों के साथ उन्होंने स्कूलिंग कर फाइनेंस में हायर एजुकेशन शुरू की. उनके भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने देहरादून स्थित प्राइवेट युनिवर्सिटी में आ गए. इसके बाद दोनों भाइयों को जब ये आइडिया आया तो दोनों ने मिलकर इसकी शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने अपने 3 दोस्तों को अपने साथ जोड़ा. उन्होंने हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सेल्स के कामों में मदद की.

इस तरह से 5 लोगों की टीम के साथ कंपनी की शुरुआत हुई. आज ये टीम 200 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है. शुरुआती चुनौतियों के बारे में उन्होने बताया कि फाइनेंस से लेकर मेन पावर तक हर चीज में शुरुआत में काफी चैलेंज था, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका आइडिया नया था. लोगों को पहली बार में भरोसा नहीं हुआ और जब उन्होंने लोगों को एक बेटर सॉल्यूशन दिया तो लोगों में उनकी स्वीकारिता बढ़ी.

“शुरुआत में हमारे पास उतने पैसे नहीं हुआ करते थे कि लोगों को उस तरह की सैलरी पर अपने साथ जोड़े. ऐसे में हमने कुछ मिनिमम पे के साथ लोगों को जोड़ा. अपने दोस्तों को कंपनी में हिस्सेदारी भी दी. इस तरह से हमारे दोस्त कंपनी में हिस्सेदार के तौर पर जुड़े, जो आज बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल हैं. इसी तरह से सौरभ बड़ोला ने शुरुआत में कंपनी में सॉफ्टवेयर संबधी सभी काम किए और आज वो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल हैं.“- अर्पित जैन, को-फाउंडर, सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज

दोस्तों ने मिलकर शुरू किया यूनिक आइडिया पर काम: सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल देहरादून निवासी सौरभ बड़ोला ने ईटीवी से बातचीत में बताया कि जब इस कंपनी की शुरुआत हुई थी, तब बहुत कम लोग साथ में थे. उन्होंने बताया कि वो कॉलेज में अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान रजत से उनकी मुलाकात हई.

दोनों अपने-अपने प्रोजेक्ट पर उस समय काम कर रहे थे, तो कई बार इन लोगों की आपस में अपने-अपने प्रोजेक्ट को लेकर बात होती थी. इसी दौरान रजत ने उन्हें बताया कि वो एक यूनिक स्टार्टअप प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. सौरभ ने भी इस प्रोजेक्ट को देखा और समझा, फिर मिल कर सभी दोस्तों ने अपने कुछ लक्ष्य तय किए और मिलकर आगे बढ़ने की ठान ली.

“जब आइडिया पर चर्चा की जा रही थी और ये फैसला हो चुका था कि पोर्टेबल ईसीजी डिवाइस स्पंदन पर काम करना है. चूंकि, हम सभी दोस्त आईटी बैकग्राउंड से थे, तो हेल्थ केयर की हमें उतनी समझ नहीं थी, लेकिन उद्देश्य और सपना तय हो चुका था, तो काम जारी रहा और कारवां बढ़ता गया. शुरुआती स्टार्टअप के दौरान अलग तरह की चुनौतिया थीं. आज जब कंपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही है, तो अलग तरह की चुनौतियां सामने हैं.“- सौरभ बड़ोला, सदस्य, सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज

उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक ही फोकस था कि डिवाइस बनानी है और उसका लक्ष्य भी तय था, लेकिन आज जब कपंनी कई देशों में अपनी हजारों डिवाइस पहुंचा चुकी है और काम फैल चुका है, तो नए तरह की चुनौतियां हर रोज सामने आती है, जिस पर लगातार वो सीख रहे हैं और अपनी टीम के साथ मिल कर काम कर रहे हैं. आज हमें दुनिया में अप-टू-डेट रहने के लिए इंटरनेट बड़ी भूमिका निभाता है. यही वजह है कि वो देहरादून में बैठकर कई देशों में अपनी सेवाए दे रहे हैं.

चारधाम में मुफ्त ईसीजी सेवा दे रही है कंपनी: कंपनी के फाउंडर अर्पित ने बताया कि उनकी कंपनी की शुरुआत देहरादून में हुई. डिवाइस भी पहले यहीं पर टेस्ट किए हैं, तो इस डिवाइस की सबसे बड़ी उपयोगिता भी उत्तराखंड में ही शुरू में सबसे ज्यादा महसूस की गई. आज जिस तरह से हार्ट अटैक की समस्या बढ़ रही है, निश्चित तौर पर इस समस्या ने समाज को एक नए खतरे की ओर धकेला है.

“हमने देखा है कि आज भी उत्तराखंड के ज्यादा पहाड़ी इलाकों में ईसीजी की सुविधा मिलना आसान नहीं है. ईसीजी मशीन के साथ प्रशिक्षित मेन पावर भी एक चुनौती है. ऐसे में हमारे डिवाइस ने पूरा गेम पलट दिया है. लोगों के पास ही नही बल्कि, सरकार के लिए भी ये विकल्प खुला है. सरकार हमारे पोर्टेबल ईसीजी डिवाइस के जरिए प्रदेश के हर कोने तक लोगों के हृदय रोगों की निगरानी रख सकती है.“-अर्पित जैन, को-फाउंडर, सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज

इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी उत्तराखंड की प्रतिष्ठित चारधाम यात्रा में पिछले कई सालों से अपने डिवासेज की मुफ्त सर्विसेज दे रही है. शुरुआत में उन्होंने पहले केदारनाथ धाम में सेवाएं दी, फिर अब सभी धामों में वो अपनी सेवाएं दे रहे हैं. जहां पर तीर्थ यात्री मुफ्त में अपनी हृदय जांच करवा सकते हैं. ये महत्वपूर्ण इसलिए हैं, क्योंकि हर साल हाई एल्टीट्यूड पर मौजूद चारों धामों में होने वाली मौतों में हार्ट अटैक सबसे बड़ी वजह है.

अब तक विदेशों से भारत आती थी टेक कंपनिया, सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज ने बदली तस्वीर: इसी तरह सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज के मुख्य फांउडर रजत जैन ने भी ईटीवी भारत से बातचीत की. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस स्टार्टअप को शुरू किया था, उस समय ईसीजी मशीन बहुत बड़ी होती थी, इनकी उपलब्धता के साथ साथ हृदय जांच में अन्य कई तरह के चैलेंजेज थे, लेकिन उनके स्पदंन प्रोडक्ट ने पूरा सिनारियो ही बदल दिया है. ईसीजी मशीन को लोगों के पॉकेट तक पहुंचा दिया है. साथ ही उन्होंने कहा कि आज उनका ये सफर काफी आगे बढ़ चुका है.

“इस वक्त हमारी 60 हजार से ज्यादा डिवाइस 25 से ज्यादा देशों में रियल टाइम में इस्तेमाल हो रही है. इसके अलावा अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका में भी हमे अपने इस प्रोडक्ट को स्केल अप कर रहे हैं. अभी तक यूएसए और यूरोप से हमने बड़ी कंपनियों को भारत आते देखा है, लेकिन आज हमारी कंपनी उन्ही कंपनियों के तर्ज पर भारत से उन देशों में जा रही है, जो कि दुनिया में टेक्निकल एडवांसमेंट के क्षेत्र में भारत को संतुलन प्रदान कर रही है.“- रजत जैन, फाउंडर, सनफॉक्स टेक्नोलॉजीज

उन्होंने बताया कि आने वाले भविष्य के इसके स्कोप को देखते हुए उनकी ओर से एक बड़ा फ्लोर लिया गया है. जिसके अभी आधे हिस्से को ही उन्होंने डेवलप किया है, लेकिन जल्द ही जिस तरह से उनकी डिवाइस और सर्विसेज दुनिया में फैल रही है, निश्चित तौर पर उन्हें और भी जरुरत पड़ेगी.

रजत जैन ने आगे बताया कि उन्होंने स्टार्टअप से लेकर आज 500 करोड़ के सफर तक गलतियां भी की है और उनसे सीख भी ली है. उन्होने बताया कि जब उन्होंने इसकी शुरुआत की थी, तो सोचा नहीं था कि इतना बड़ा होगा. आज वो एक बड़ी कंपनी की तर्ज पर मार्केट में हैं. इसी तरह से लगातार आगे बढ़ते रहना ही उनका लक्ष्य है.

 

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